Gitanjali Multilingual Literary Circle
डॉ. वंदना मुकेश
जन्म: भोपाल। शिक्षा: विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन से स्नातक तथा पुणे विद्यापीठ से अंग्रेज़ी एवं हिंदी में स्नातकोत्तर एवं हिंदी में पी.एचडी की उपाधि। इंग्लैंड से क्वालीफाइड टीचर स्टेटस।
प्रकाशित कृतियां: 1987 में साप्ताहिक हिंदुस्तान में पहली कविता 'खामोश ज़िंदगी' के प्रकाशन से अब तक विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं जैसे गगनांचल, साहित्य अमृत, वागर्थ, ज्ञानोदय, वर्तमान साहित्य, अक्षरा, हरिगंधा, गर्भनाल, आधुनिक साहित्य, पुरवाई (यू.के.), चेतना (कनाडा) आदि और साहित्यिक-समीक्षात्मक पुस्तकों, वेब पत्र-पत्रिकाओं में विविध विषयों पर कहानियाँ, कविताएँ, संस्मरण, समीक्षाएँ, लेख, एवं शोध-पत्र प्रकाशित।
प्रकाशन-
1. 'नौंवे दशक का हिंदी निबंध साहित्य एक विवेचन' शोध प्रबंध- 2002,
2. ‘मौन मुखर जब’ (काव्य संग्रह) 2015
संपादन-
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'मन के मनके' रामनारायण सिरोठिया, (काव्य संग्रह) 2016
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‘परि भारत में किसान न बनइयो’(निबंध संकलन) डॉ. केशव प्रथमवीर 2018
सहलेखन- डैड, पॉप्स और मैं (लघु उपन्यास-संकल्पना–संपादन उषा वर्मा 2016,)
प्रसारण- य़ू.के. में स्थानीय टी.वी. चैनल पर काव्य पाठ, बी.बी.सी. वैस्ट मिडलैंड्स रेडियो, आकाशवाणी पुणे से काव्य-पाठ एवं वार्ताएँ प्रसारित। वेब वार्ताओं ,काव्य गोष्ठियों, मुशायरों में सहभागिता।
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भारत एवं इंग्लैंड में अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध संगोष्ठियों में प्रपत्र वाचन, सहभाग और सम्मान।
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विश्व हिंदी सचिवालय द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कहानी प्रतियोगिता 2019 में भौगोलिक क्षेत्र यूरोप-यू.के. में प्रथम स्थान
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रविंद्रनाथ टैगोर युनिवर्सिटी, भोपाल द्वारा आयोजित विश्वरंग कार्यक्रम2019 तथा 2020 में सहभाग
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सम्मान पब्लिक रिलेशंस सोसायटी भोपाल द्वारा साहित्य सम्मान 2019
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इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र द्वारा आयोजित डॉ. कृष्णबिहारी मिश्र पर आधारित संस्कृति श्रृंखला-7 फरवरी 2018 में कोलकाता में वक्ता के रूप में सम्मानित
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विश्व हिंदी साहित्य परिषद, दिल्ली द्वारा ‘सृजन भारती’ सम्मान 2016
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भारतीय उच्चायोग लंदन द्वारा डॉ. लक्ष्मीमल सिंघवी अनुदान-सम्मान 2014
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यू.के. क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन 2011, में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिये भारत सरकार द्वारा विशिष्ट सम्मान
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2004 से गीतांजलि बहुभाषीय साहित्यिक संस्था, बर्मिंघम यू.के. की सदस्य।
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संप्रति: इंग्लैंड में अध्यापन एवं स्वतंत्र लेखन।