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​श्री आनंद कुमार  

आनंद कुमार (जन्म—1 जनवरी, 1973, भारत के बिहार राज्य के पटना में) गणित के विख्यात शिक्षक हैं। लेकिन एक शिक्षक होने से कहीं अधिक, उनकी ख्याति एक ऐसे व्यक्ति के रूप में है, जिसकी क्रांतिकारी शैक्षणिक पहल “सुपर 30” ने एक मौन सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत की। गणित के प्रति बचपन से आकर्षण के कारण उन्होंने उस वक्त ही ‘रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स’ नाम का गणित का एक क्लब बनाया था, जब वह ग्रेजुएशन में थे। उसी दौरान, गणित के उनके सवाल और लेख प्रसिद्ध पत्रिकाओं और समाचार-पत्रों में प्रकाशित हुए। वर्ष 1994 में, आनंद को कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से उच्‍च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला, लेकिन खराब आर्थिक स्थिति उनके आड़े आ गए। उनके पिता, जो डाक विभाग में बेहद कम वेतन प्राप्त करनेवाले कर्मचारी थे, उनका अचानक निधन हो गया, जिससे परिवार के आय का मुख्य स्रोत समाप्त हो गया। उनकी माँ घर चलाने के लिए पापड़ बनाया करती थीं। आनंद शाम के समय उन्हें पहुँचाने और बेचने का काम किया करते थे और दिन में गणित के सूत्र व लेख लिखा करते थे। बचपन से ही घोर आर्थिक तंगी को देखने के कारण, गरीबी का उन्होंने ऐसे दंश झेला था कि गरीब छात्रों के लिए उन्होंने कुछ करने का फैसला किया, जिनके सपने सही अवसर न मिलने के कारण बिखर जाते थे। और यही उनके सुपर 30 प्रोग्राम की शुरुआत का कारण बना।

सुपर 30 के 17 वर्षों के सफर में, असाधारण रूप से 510 छात्रों ने भारत के चोटी के तकनीकी संस्थानों में अपना नाम दर्ज कराया। यह उपलब्धि इस कारण उल्लेखनीय है, क्योंकि अधिकांश सफल छात्रों का संबंध समाज के सबसे वंचित वर्गों से रहा है। उनमें से कई ने अपनी पहली पीढ़ी में पढ़ाई शुरू की और अत्यधिक गरीबी के बीच ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े और औसत दर्जे के स्कूलों से शिक्षा प्राप्त की थी। वहाँ से वे भारत के उन संस्थानों तक पहुँचे जहाँ के सपने भी वे कुछ वर्षों पहले तक नहीं देख सकते थे। उन्हें मुफ्त भोजन, रहने की सुविधा और इन सबसे अधिक मुफ्त की कोचिंग मिली। भले ही आनंद कुमार को निजी क्षेत्र के साथ ही सरकार से अपने अभियान के लिए वित्तीय सहायता के प्रस्ताव मिले, लेकिन आनंद कुमार अकेले ही इस पूरी मुहिम को अपने दम पर आगे बढ़ा रहे हैं। इस महान् काम को आगे बढ़ाने के लिए वह अपने प्राइवेट ट्‍यूशन से होनेवाली आय का एक हिस्सा खर्च करते हैं। इस काम में उनका परिवार भी उनके साथ है। 

दुनिया भर के अनेक चैनलों, प्रमुख अखबारों और पत्रिकाओं ने सुपर 30 के सार को अपने-अपने तरीके से देखने और दिखाने का प्रयास किया है। आनंद और सुपर 30 पर आधे घंटे की डॉक्यूमेंट्री बनानेवाले डिस्कवरी चैनल ने इसे “सामाजिक परिवर्तन लानेवाला क्रांतिकारी प्रयोग” बताया, जबकि जापान के एस.टी.बी. रिसर्स इंस्टीट्‍यूट के प्रमुख अर्थशास्त्री, योइची इटोह, जिन्होंने सुपर 30 पर जापान के लोकप्रिय चैनल एन.एच.के. के लिए एक फिल्म भी बनाई है, इसे “भारत का सीक्रेट वेपन” (भारत का गुप्त हथियार) बताया है। आनंद के प्रयासों पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए अभिनेत्री और पूर्व मिस जापान, नोरिका फुजीवारा पटना आई थीं। सुपर 30 पर बनी कई फिल्मों ने अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीता है। सुपर 30 के इस मौन आंदोलन के लिए आनंद कुमार को देश के अनेक शीर्ष संगठनों ने सम्मानित किया है। फ्रेंच 24 ने भी आनंद के जीवन पर एक शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई थी। पढ़ाने की उनकी कमाल की क्षमताओं के कारण लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने उनका नाम दर्ज किया था। टाइम मैगजीन ने अपनी बेस्ट ऑफ एशिया 2010 की लिस्ट के लिए गणितज्ञ आनंद कुमार के सुपर 30 को चुना था। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के विशेष दूत रशाद हुसैन ने सुपर 30 की प्रशंसा करते हुए, इसे देश का “सबसे अच्छा” संस्थान कहा था। न्यूजवीक पत्रिका ने गणितज्ञ आनंद कुमार के सुपर 30 की ओर से किए गए प्रयासों पर गौर किया है और इस स्कूल को दुनिया के चार सबसे अनोखे स्कूलों की सूची में शामिल किया है। आनंद कुमार को नवंबर 2010 में बिहार सरकार के सर्वोच्‍च पुरस्कार “मौलाना अब्दुल कलाम आजाद शिक्षा पुरस्कार” से सम्मानित किया गया था। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ए.बी.वी.पी.) ने उन्हें बेंगलुरु में प्रोफेसर यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार 2010 से नवाजा था। अप्रैल 2011 में, यूरोप की पत्रिका फोकस ने आनंद कुमार को “विश्व की उन हस्तियों में से एक” के रूप में चुना था, “जिनमें असाधारण रूप से प्रतिभावन लोगों को निखारने की क्षमता” है। ब्रिटेन की पत्रिका मोनोकल ने उन्हें दुनिया के 20 पथप्रदर्शक शिक्षकों की सूची में शामिल किया है। आनंद कुमार ने अमिताभ बच्‍चन को फिल्म आरक्षण में उनकी भूमिका निभाने में मदद की थी। जाने-माने निर्माता और निर्देशक समेत बॉलीवुड के कई लोगों की आनंद कुमार के जीवन पर फिल्म बनाने में दिलचस्पी है। चाइना टी.वी. ने अपने एक बेहद लोकप्रिय कार्यक्रम में विशेष मेहमान के रूप में उन्हें बुलाया था। चाइना इंटरनेशनल रेडियो, बी.बी.सी. और जर्मन रेडियो ने भी सुपर 30 पर कार्यक्रमों का प्रसारण किया है। 

कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया राज्य की सरकार ने भी उन्हें सम्मानित किया है। हाल ही में, गरीबों को विशेष शिक्षा देने के लिए आनंद कुमार ने बैंक ऑफ बड़ौदा पुरस्कार प्राप्त किया है। उनसे पहले अभिनेत्री वहीदा रहमान, क्रिकेट खिलाड़ी कपिल देव, गायक पंडित जसराज और फिल्म निर्माता यश चोपड़ा को यह पुरस्कार दिया गया है। राजकोट में आयोजित आठवें राष्ट्रीय गणित सम्मेलन में कुमार को प्रतिष्ठित रामानुजन गणित पुरस्कार से नवाज़ा गया था। कोयंबटूर स्थित कार्पगम यूनिवर्सिटी ने उन्हें  विज्ञान के मानद डॉक्टरेट (डी.एस.सी.) की उपाधि दी है। शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें महर्षि वेद व्यास पुरस्कार दिया था। जर्मनी के सैक्सोनी राज्य के शिक्षा मंत्रालय ने भी आनंद कुमार को सम्मानित किया था। 

जुलाई 2019 में, आनंद कुमार के जीवन पर बनी सुपरहिट फिल्म रिलीज हुई थी, जिसका निर्देशन विकास बहल ने किया और हृतिक रोशन ने कुमार की भूमिका निभाई थी। कुमार ने अपनी जीवनी भारत के तत्कालीन माननीय राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी को भेंट की थी जिसे कनाडा में बसे मनोचिकित्सक बीजू मैथ्यू ने लिखा था। आनंद कुमार को भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने “राष्ट्रीय बाल कल्याण अवार्ड” से पुरस्कृत किया था।

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